Monday, February 15, 2010

अन्ध विश्वास घृणाओं का जीवन

सृष्टि की रचनाओं को पूजना भारत में प्राचीन बीमारी है सबका मालिक एक है यह सब बोलते है, समझते हैं, मगर फिर भी अपने हाथों के बनाये बुतों को तथा अपने हाथों के लगाऐ पोधों को पूजते है जब यह जानते है कि इस सम्पूर्ण सृष्टि का रचियता सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रचियता पूरी कायनात के बनाने वाला इस पूरे सिस्टम के चलाने वाला एक है वह सर्व प्रिय है कण-कण, क्षण-क्षण में विद्यमान है सर्वव्यापी है कण-कण, क्षण-क्षण उसके घेरे में है कब्जे में है वह अपनी बनाई हर रचना को अन्दर तथा बाहर से पूर्णतय भली प्रकार जानता है पहचानता है वह अपनी सृष्टि की हर रचना का ‘शुरू तथा अन्त भी जानता है जननी मॉ है मगर जिन्दगी व मौत हर रचना को देने वाला पैदा करने वाला पालने वाला वही एक अल्लाह है वह सब का र ब है धरती में बीज हम डालते हैं बीज को धरती में रब पालता है जान डालता है पौधा निकालता है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कण-कण, क्षण-क्षण को पूरी तरह संभाले हुए है वह हमेशा से है, हमेशा रहेगा, वह हमेशा से सचेत है चैकन्ना है ना उसे ऊँघ  आती है ना नींद आती है ना उसका कोई बाप है ना उसका कोई बेटा है ना उसने किसी को जना है ना वह किसी से जना गया वह इन्सानी रिश्तों से अलग है पवित्र है उसकी सृष्टि की हर रचना आधारित है वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रचियता हर प्रकार से निराधारित है निराधार है वह सबका सहारा है उसके किसी समय किसी के सहारे की आवश्यकता नही है वह अनन्त है उसकी हर एक रचना का अन्त है, खात्मा है, मौत है समस्त रचनाऐ उसके घेरे से बाहर नहीं है चूंकि यह सम्पूर्ण सृष्टि अपने पैदा करने वाले रब अल्लाह के सामने एक कण के समान है मस्जिदों से ऐलान होता है पॉच समय ऐलान होता है अल्लाहु अकबर अर्थात अल्लाह सब से बडा है रचनाओं को पूजने में हर इन्सान हमेशा अटकता, लटकता,भटकता, बहकता, लूटता-लुटता, पिटता-पीटता रहेगा। सृष्टि की रचनाओं को पूजना नर्क का मार्ग है नर्क मे आग है हर रचना के पूजारी हेतु भी आग ही आग है आग में जलना, आग में जलाना रचनाओं के पूजने का रिवाज है एक अकेले अनन्त -अल्लाह, परमेश्वर, सर्वशक्तिमान को पूजने में मोक्ष है निजात है बचाव है जन्नत है स्वर्ग है हर अच्छाई व हरसच्वाई का परिणाम भी अच्छा है। सब से नाता टूटना ख़तरनाक नही, रब से नाता टूट जाना हर एक इनसान के लिये खतरनाक है बेचैनी का कारण है। हर एक मानव जीवन पर हर पल हर ‘वॉस में करोडो जीव खर्च होते है ‘शाकाहार मॉसाहार इनसान की क्षेत्रीय जरूरत है या घृणाओं का प्रचार प्रसार है। अल्लाह सर्वव्यापी है जिसकी कण कण क्षण क्षण पर सरकार है हर सरकार जानती है कि मानव जीवन पर मेरा क्या खर्च होता रहता है। सृष्टि रचियता अल्लाह हम सब से हिसाब लेगा, हम सबको हिसाब देना होगा, हिसाब लेने के बाद दूसरा जीवन मिलेगा राहतो का जीवन या मुसीबतों का जीवन-स्वर्ग या नर्क-  
  सोचिए- समझये - गौर  कीजिए -ख़ुद बचें- दूसरों को बचाएं- स्वर्ग पाऐं। 


प्रेरक-चिन्तक-समीक्षकः-

‘शाईरे इस्लाम ः-

मेराज ख़ान मेराज देवबन्दी -मेराज मार्किट मटकोटा देवबन्द जि0 सहारनपुर(यू.पी 09359246046,09456025477, 09997060138)  

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