Monday, February 15, 2010

देश में समस्त घृणाओ की बुनियाद अन्धविश्वास है: मौलाना मैराज ख़ान मेराज देवबन्दी

 चान्द सूरज ‘ज़मीन आसमान ‘आकाश प्रकाश, सितारे समुद्र ‘इन्सान हैवान ‘पेड़पौधे जानवर इत्यादि रचनाऐं है हवाऐं फ़िजाऐं रात दिन भी इस सृष्टि की रचनाऐं है दुनिया के समस्त स्कूल कालेज यूनिवर्सिटीयों में सृष्टि की रचनाओ का ज्ञान दिया जाता हे रचनाओं की ही उथल पुथल पर चर्चाएं होती हैं जबकि हर चीज, सृष्टि की हर एक रचना का अन्त है ख़ात्मा है विनाश है सरहद है मौत है हर सृष्टि की रचना क्या चीज है यह पहचान कराई जाती है।
  दुनिया के समस्त इसलामी मदरसों में सृष्टि के रचियता का ज्ञान दिया जाता है इस सृष्टि का रचियता स्वम् अनन्त है सर्वव्यापी है कण कण क्षण क्षण में विद्यमान है जब वह कण कण क्षण क्षण में विद्यमान है सर्वव्यापी है तो ना कभी वह रूप धारण करके आया ना कभी रूप धारण करके आयेगा और ना ही उसको रूप धारण करने की कोई आवश्यकता है वह जब जिस कण जिस क्षण को हुक्म देगा वही हो जायेगा तथा हो जाता है। याद रहे-रचनाऐ आधारित है सृष्टि रचियत निराधार है सृष्टि रचियता अनन्त है बेहूदूद है ना उसका बाप है ना बेटा है वह किसी का रिश्तेदार नही है वह समस्त इन्सानी रिश्तो से भी पूरी तरह पवित्र है यह पूरी सृष्टि, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उस सृष्टि रचियता परमेश्वर-सर्वशक्तिमान अल्लाह के सामने कण के समान है सृष्टि की रचनाओं का अन्त है मौत है और खात्मा है। सृष्टि का रचियता वही है जिसे ना मौत आती है ना नींद आती है ना ऊँघ आती है वह अनन्त है हर पत्ते पत्ते में जर्रे जर्रे मे हर इनसान के हर हाथ में पॉव में अल्लाह लिखा है और हर एक इन्सान के ‘शरीर की बनावट अर्बी जुबान में मुहम्मद  
है। अन्धविश्वास में इनसान हमेशा अटकता लटकता भटकता लुटता पिटता रहेगा इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इस सम्पूर्ण सृष्टि के एक अकेले रचियता अल्लाह ने अपने पैगम्बर रसूल सन्देशक महान पुरूष भेजे सब ने ये ही बताया कि सबका मालिक सबका ख़ालिक एक है
 किसी भी महान पुरूष ने कभी नही कहा कि मेरे मरने के पश्चात मुझे पूजना सबने एक ही विशेष कथन कहा कि सब का मालिक एक है सिर्फ एक के ध्यान में लीन हो विलीन हों। हम किसी भी महान पुरूष का कहीं भी निरादर तथा अपमान भी ना करे मगर पूजें भी नहीं इनसानियत के बगैर इनसान बेकार है मानवता के बगैर मान जीवन बेकार है तेज़ भूख हो तो खाना खाओ और खाते खाते जब कुछ भूख रह जाये तो खाना छोड़ दो? यह मुहम्मद साहब ने फरमाया स्वास्थय का विशेष तरीका बतलाया है। यह दुनिया हमारे रहने की जगह है इसमें उसने अपना कानून हमें कुरआन दिया है जो सर्वश्रेष्ठ है जुबानी याद हो जाता है।
 हम मुहम्मद साहब के सॉचे मे ढ़लकर उनके सर्वोच्च तरीको पर चलकर ही- परमेश्वर से सबके मालिक से आलमाईटी से सर्वशक्तिमान से अल्लाह से मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं वही एक एकता का आधार है सर्वशक्तिमान है कण कण क्षण क्षण में विद्यमान है। रचनाओं के आशिक तथा गुलाम झूठे तथा मक्कार घूसख़ोर रिश्वत ख़ोर होते है उपकारी नहीं धितकारी होते है सृष्टि के रचियता,एक अकेले अल्लाह के आशिक व गुलाम नेक ‘शरीफ भले उच्च स्थान प्राप्त उपकारी तथा हर एक मान सम्मान के अधिकारी होते है आप भी बनें। दूसरों को भी बनायें। रब सब का है अपने रब (पालने वाले) के ध्यान में लीन तथा विलीन होना सुख का प्रमाण है। रचनाऐ तो रचनाऐं हैं रचियता नही है-हर चीज़ में खुदा है ख़ुदा चीज़ नही है।  
दारूल उलूम देवबन्द सृष्टि के अकेले रचियता के ज्ञान का भण्डार है एक अकेला अल्लाह ही सृष्टि रचियता है कण कण क्षण क्षण में विद्यमान है सर्वव्यापी है सिर्फ उसी के ध्यान में लीन तथा विलीन होना दारूल उलूम देवबन्द में सिखाया जाता है। प्राप्त करें
  सब से नाता टूटना ख़तरनाक नही, रब से नाता टूट जाना हर एक इनसान के लिये खतरनाक है बेचैनी का कारण है। हर एक मानव जीवन पर हर पल हर ‘वॉस में करोडो जीव खर्च होते है ‘शाकाहार मॉसाहार इनसान की क्षेत्रीय जरूरत है या घृणाओं का प्रचार प्रसार है। अल्लाह सर्वव्यापी है जिसकी कण कण क्षण क्षण पर सरकार है हर सरकार जानती है कि मानव जीवन पर मेरा क्या खर्च होता रहता है। सृष्टि रचियता अल्लाह हम सब से हिसाब लेगा, हम सबको हिसाब देना होगा, हिसाब लेने के बाद दूसरा जीवन मिलेगा राहतो का जीवन या मुसीबतों का जीवन-स्वर्ग या नर्क-
  आसमान विशाल है विश्व की छतरी है विश्व की छतरी के साये में जीव जन्तु, प्राणी, मानव-दानव रहते हैं तो क्या आकाश को पूजें-सूर्य की ऊर्जा व धूप हम लेते है फल पकते हैं फसले तैयार होती हैं तो क्या सूरज को पूजें-चन्द्रमा से मीठा प्रकाश मीठे प्रकाश से फल मीठा मिलता है तो क्या चॉद को पूजें- धरती पर रहते हैं फसलें तथा अन्न उपजाते हैं खाते पीते हैं इसी पर पेशाब पखाना करते हैं तो क्या धरती को पूजें- नहीं हरगिज नहीं ये सब सृष्टि की रचनाऐं हैं- हम पूजें जरूर पूजें मगर सिर्फ और सिर्फ सृष्टि के एक अकेले रचियता अनन्त निराधारित अल्लाह को ही पूजें जिन चीजों का अन्त है खात्मा है या अन्त का लक्षण है उनको हरगिज हरगिज कभी न पूजें-एक अनन्त सबसे बडे अल्लाह को ही पूजें जिसके सामने सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक कण के समान है।
 हर एक मानव जीवन पर हर पल हर एक ‘वास पर करोडों जीव खर्च होते है ‘शाकाहार मॉसाहार क्षेत्रिय जरूरत है अन्यथा धृणाओं का प्रचार प्रसार है?
  सृष्टि का रचियता अल्लाह सर्वव्यापी है जिसकी कण कण क्षण क्षण पर सरकार है व अपनी सृष्टि की हर रचना को अन्दर और बाहर से घेरे हुए है तथा पूर्णतय हर चीज के ‘शुरू और अन्त से अवगत है जिसकी हम पर सरकार है वह सरकार मानव से उसके जीवन पर हुए खर्च का हिसाब एक दिन हम से जरूर लेगा हमें हिसाब देना होगा।  

  प्रेरक-चिन्तक-समीक्षकः-

‘शाईरे इस्लाम ः-मेराज ख़ान मेराज देवबन्दी  

-मेराज मार्किट मटकोटा देवबन्द जि0 सहारनपुर(यू.पी.)
0935924604609456025477, 09997060138

अन्ध विश्वास घृणाओं का जीवन

सृष्टि की रचनाओं को पूजना भारत में प्राचीन बीमारी है सबका मालिक एक है यह सब बोलते है, समझते हैं, मगर फिर भी अपने हाथों के बनाये बुतों को तथा अपने हाथों के लगाऐ पोधों को पूजते है जब यह जानते है कि इस सम्पूर्ण सृष्टि का रचियता सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रचियता पूरी कायनात के बनाने वाला इस पूरे सिस्टम के चलाने वाला एक है वह सर्व प्रिय है कण-कण, क्षण-क्षण में विद्यमान है सर्वव्यापी है कण-कण, क्षण-क्षण उसके घेरे में है कब्जे में है वह अपनी बनाई हर रचना को अन्दर तथा बाहर से पूर्णतय भली प्रकार जानता है पहचानता है वह अपनी सृष्टि की हर रचना का ‘शुरू तथा अन्त भी जानता है जननी मॉ है मगर जिन्दगी व मौत हर रचना को देने वाला पैदा करने वाला पालने वाला वही एक अल्लाह है वह सब का र ब है धरती में बीज हम डालते हैं बीज को धरती में रब पालता है जान डालता है पौधा निकालता है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कण-कण, क्षण-क्षण को पूरी तरह संभाले हुए है वह हमेशा से है, हमेशा रहेगा, वह हमेशा से सचेत है चैकन्ना है ना उसे ऊँघ  आती है ना नींद आती है ना उसका कोई बाप है ना उसका कोई बेटा है ना उसने किसी को जना है ना वह किसी से जना गया वह इन्सानी रिश्तों से अलग है पवित्र है उसकी सृष्टि की हर रचना आधारित है वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रचियता हर प्रकार से निराधारित है निराधार है वह सबका सहारा है उसके किसी समय किसी के सहारे की आवश्यकता नही है वह अनन्त है उसकी हर एक रचना का अन्त है, खात्मा है, मौत है समस्त रचनाऐ उसके घेरे से बाहर नहीं है चूंकि यह सम्पूर्ण सृष्टि अपने पैदा करने वाले रब अल्लाह के सामने एक कण के समान है मस्जिदों से ऐलान होता है पॉच समय ऐलान होता है अल्लाहु अकबर अर्थात अल्लाह सब से बडा है रचनाओं को पूजने में हर इन्सान हमेशा अटकता, लटकता,भटकता, बहकता, लूटता-लुटता, पिटता-पीटता रहेगा। सृष्टि की रचनाओं को पूजना नर्क का मार्ग है नर्क मे आग है हर रचना के पूजारी हेतु भी आग ही आग है आग में जलना, आग में जलाना रचनाओं के पूजने का रिवाज है एक अकेले अनन्त -अल्लाह, परमेश्वर, सर्वशक्तिमान को पूजने में मोक्ष है निजात है बचाव है जन्नत है स्वर्ग है हर अच्छाई व हरसच्वाई का परिणाम भी अच्छा है। सब से नाता टूटना ख़तरनाक नही, रब से नाता टूट जाना हर एक इनसान के लिये खतरनाक है बेचैनी का कारण है। हर एक मानव जीवन पर हर पल हर ‘वॉस में करोडो जीव खर्च होते है ‘शाकाहार मॉसाहार इनसान की क्षेत्रीय जरूरत है या घृणाओं का प्रचार प्रसार है। अल्लाह सर्वव्यापी है जिसकी कण कण क्षण क्षण पर सरकार है हर सरकार जानती है कि मानव जीवन पर मेरा क्या खर्च होता रहता है। सृष्टि रचियता अल्लाह हम सब से हिसाब लेगा, हम सबको हिसाब देना होगा, हिसाब लेने के बाद दूसरा जीवन मिलेगा राहतो का जीवन या मुसीबतों का जीवन-स्वर्ग या नर्क-  
  सोचिए- समझये - गौर  कीजिए -ख़ुद बचें- दूसरों को बचाएं- स्वर्ग पाऐं। 


प्रेरक-चिन्तक-समीक्षकः-

‘शाईरे इस्लाम ः-

मेराज ख़ान मेराज देवबन्दी -मेराज मार्किट मटकोटा देवबन्द जि0 सहारनपुर(यू.पी 09359246046,09456025477, 09997060138)  

कण कण क्षण क्षण में विद्यमान है सर्वव्यापी है

कण कण क्षण क्षण में विद्यमान है सर्वव्यापी है
रचनाऐ आधारित है सृष्टि रचियता निरआधारित है

रचनाओं का अन्त है रचियता अकेला है अनन्त है रचनाऐ महदूद हैं रचियता सब से बडा है ला महदूद है सृष्टि का अकेला अल्लाह ही रचियता है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इस सम्पूर्ण सृष्टि को तथा सृष्टि की हर रचना को अन्दर तथा बाहर से घेरे हुए है कोई चीज उसके कब्जे से बाहर नही है आजाद नही है। सृष्टि के रचियता अल्लाह को पूजना पूर्ण विश्वास है सृष्टि की रचनाओ को पूजना अन्धविश्वास है महान पुरूप भी रचनाऐ थे अन्त हुआ चल बसे हम उन का निरादर तथा अपमान भी ना करें मगर पूजे भी नही अन्ध विश्वास विश्व के हर इन्सान की तबाही तथा बर्बादी है।


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लाईलाज दर्दो व मर्जो के मुआलिज 

 ‘शाइरे इस्लाम

मुहम्मद मेराज ख़ान मेराज, मटकोटा देवबन्द।

01336-222290,9359246046,9456025477, 9997060138