रचनाऐ आधारित है सृष्टि रचियता निरआधारित है
रचनाओं का अन्त है रचियता अकेला है अनन्त है रचनाऐ महदूद हैं रचियता सब से बडा है ला महदूद है सृष्टि का अकेला अल्लाह ही रचियता है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इस सम्पूर्ण सृष्टि को तथा सृष्टि की हर रचना को अन्दर तथा बाहर से घेरे हुए है कोई चीज उसके कब्जे से बाहर नही है आजाद नही है। सृष्टि के रचियता अल्लाह को पूजना पूर्ण विश्वास है सृष्टि की रचनाओ को पूजना अन्धविश्वास है महान पुरूप भी रचनाऐ थे अन्त हुआ चल बसे हम उन का निरादर तथा अपमान भी ना करें मगर पूजे भी नही अन्ध विश्वास विश्व के हर इन्सान की तबाही तथा बर्बादी है।
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लाईलाज दर्दो व मर्जो के मुआलिज
‘शाइरे इस्लाम
मुहम्मद मेराज ख़ान मेराज, मटकोटा देवबन्द।
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